मन की गहराइयों
में मख़्फ़ी
एक ख़याल
अक्सर मेरे ज़हन में
दस्तक दे जाता है
धीमी आवाज़ में
फुस-फुसाकर
मुझे याद दिलाता है
वही, जिसे सोच के
मैं घबरा जाता हूँ
कुछ बेकस, कुछ मायूस
हो जाता हूँ

मूँह फेरने की
कोशिश करता हूँ
मगर न चाह के
भी सोचता हूँ
सबसे कितना अलग हूँ
सबसे कितना जुदा
थोड़ा तो अजीब हूँ
थोड़ा सिरफिरा
कुछ बेहिसाब हूँ
और कुछ बेतुका
किसका हमनवां हूँ
मैं किसका हमनवां ?

परेशन होकर, बेबस होकर
ख़ुद पे कुछ
झुंझलाता हूँ
फिर एकदम ही
याद आती है
उस कमज़ात ख़याल
की गुस्ताख़ी

मैं उसे डाँटता हूँ
फटकारता हूँ
धमका के उसे
वापस भेज देता हूँ
वहीं, जहाँ से वो
बिन बुलाए मेहमान
की तरह मूँह उठाए
चला आया था

मैं अक्सर उसे
दरिया-ए-दिल में
धकेल देता हूँ
सोचता हूँ
इस बार तो ये डूब ही जाएगा..

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मख़्फ़ी – hidden                               ख़याल – a thought
ज़हन – mind                                    बेकस – helpless
मायूस – sad                                     सिरफिरा – mad
हमनवां – like-minded friend            कमज़ात – lowly
गुस्ताख़ी – fault                                 दरिया-ए-दिल – sea of the heart

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